किरती चक्र: शांति‑काल में दिखायी गई असाधारण बहादुरी
किरती चक्र नाम सुनते ही दिमाग में बहादुरी और त्याग की तस्वीर उभर आती है। यह पुरुस्कार उन लोगों को मिलता है जिन्होंने शांति के समय में भी जान पर खेलकर दूसरों की रक्षा या सुरक्षा की। कोई बड़ा युद्ध जरूरी नहीं — खतरे की स्थिति में साहस दिखाना ही इसका मुख्य मानदंड है।
आज हम सरल भाषा में समझते हैं कि किरती चक्र क्या है, किसे मिलता है और क्यों इसकी अहमियत बनी रहती है। अगर आप समाचार पढ़ते हैं तो कभी‑कभी ऐसी खबरें दिखाई देतीं हैं जहाँ पुलिस, सैनिक या आम नागरिक ने बड़े जोखिम पर लोगों की जान बचाई — ऐसे ही मामलों के लिए यह सम्मान दिया जाता है।
क्यों खास है यह पुरस्कार?
सबसे पहले, यह पुरस्कार सिर्फ सेना वालों के लिए नहीं है। पुलिसकर्मी, अग्निशमनकर्मी, नागरिक और अन्य सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी भी इसे पा सकते हैं। यह बहादुरी के व्यक्तिगत काम को पहचानता है — चाहे वह एक बड़ा आपदा प्रबंधन हो या अचानक हुए हिंसक हमले में किसी की जान बचाना।
पुरस्कार मिलने की प्रक्रिया भी स्पष्ट होती है: संबंधित विभाग या सुपीरियर अधिकारी घटना की रिपोर्ट करते हैं और नामांकन भेजते हैं। उसके बाद समीक्षा‑समिति मामलों को देखती है और फैसले कर पुरस्कार तय होता है। कई बार यह सम्मान शहीद हुए लोगों को भी मृत्युपोस्टह्यूम दिया जाता है, ताकि उनके परिवार को उनकी बहादुरी की कद्र दिखाई जा सके।
किरती चक्र से जुड़ी उपयोगी बातें
- यह शांति‑कालीन वीरता के लिए दिया जाता है, न कि युद्ध के सीधे मुकाबले के लिए।
- नामांकन आमतौर पर घटनास्थल के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाता है।
- कई बार पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति इसे प्रदान करते हैं।
- यह न केवल सम्मान है बल्कि समाज में बहादुरी को बढ़ावा देने का जरिया भी माना जाता है।
क्या आप ऐसी खबरें पढ़ना चाहते हैं जहाँ लोगों ने असाधारण साहस दिखाया हो? हमारे "जमा समाचार" पर हम ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करते हैं—सटीक और तुरंत। अगर किसी घटना में किरती चक्र जैसे पुरस्कार का जिक्र आता है तो उससे जुड़ी पृष्ठभूमि, घटनाक्रम और परिवार की प्रतिक्रिया भी यहां मिलती है।
अंत में, किरती चक्र सिर्फ एक पदक नहीं है। यह एक संदेश है—कि सामान्य समय में भी असाधारण काम किया जा सकता है और समाज उसे याद रखता है। अगले बार जब आप किसी बहादुरी की खबर पढ़ें, तो सोचिये कि छोटे‑छोटे फैसले कैसे किसी की जान बचा देते हैं और उन्हें सम्मान मिल सकता है।
और अगर आप किरती चक्र से जुड़ी ताज़ा खबरें देखना चाहते हैं, तो इस टैग पेज पर प्रकाशित आलेखों को चेक करें—यहां हम घटनाओं और पुरस्कार दोनों की अपडेट देते रहते हैं।

किरती चक्र से सम्मानित कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी स्मरण में: 'साधारण मौत नहीं मरेंगे'
- जुल॰, 8 2024
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कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत किरती चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी स्मृति सिंह ने गर्व और दुःख के मिश्रण के साथ यह सम्मान स्वीकार किया। स्मृति ने अपने पति की बहादुरी और उनके द्वारा कहे गए शब्दों को याद किया, 'मैं साधारण मौत नहीं मरूंगा।' यह समारोह उनकी सेवा और बलिदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था।
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