कार्तिक पूर्णिमा: दीपों और पुण्य की रात
क्या आपने कभी सोचा है कि एक रात में घाटों पर हजारों दीये कैसे जल उठते हैं? यही कार्तिक पूर्णिमा की खासियत है। यह हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने की पूर्णिमा का दिन होता है, जिसे कई जगहों पर बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
तारीख हर साल चंद्र कैलेंडर के हिसाब से बदलती है, इसलिए पंचांग देखकर ही निश्चित तारीख जानें। सामान्यत: यह अक्टूबर-नवंबर के बीच आती है और लोग इस दिन को पुण्य प्राप्त करने के लिए खास तौर पर चुनते हैं।
मुख्य रस्में और रीति-रिवाज
सबसे पहले आता है पवित्र स्नान—लोग सुबह या शाम को नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय में स्नान कर पापमोचन की कामना करते हैं। गंगा घाटों पर रात में दीपदान होता है: छोटे-छोटे मिट्टी के दीए पानी पर तैराए जाते हैं और पूरा घाट जगमगा उठता है।
दूसरा, मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारे होते हैं। कई समुदायों में पढ़ाई-लिखाई, यज्ञ और कीर्तन होते हैं। कुछ जगहों पर दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है—खाद्य, कपड़े या धन दान कर लोग पुण्य कमाते हैं।
क्यों माना जाता है खास?
कार्तिक माह को पवित्र माना जाता है और पूर्णिमा पर किए गये कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है। लोग मानते हैं कि इस दिन किया गया स्नान और दीपदान धार्मिक लाभ देता है। वाराणसी और कई धार्मिक शहरों में इस रात को 'देव दीपावली' के रूप में भी मनाया जाता है—घाटों पर देवताओं के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन कई स्थानीय मेलों और सजावटों का आयोजन भी होता है। परिवार मिलकर पूजा करते हैं, बूढ़े-नवजवान सब धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और मंदिरों का माहौल खूबसूरत हो जाता है।
अगर आप पहली बार जाने वाले हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें: दीयों को सुरक्षित जगह पर रखें, आग से बचाव का इंतजाम रखें और नदी में फूल-दिये डालते समय सफाई का ध्यान रखें। इलेक्ट्रिक लाइटिंग और बायोडिग्रेडेबल दीये पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हैं।
जामा समाचार पर हम हर साल कार्तिक पूर्णिमा की लोक परंपराओं, बड़े घाटों की रिपोर्ट और स्थानीय मेले-पूजाओं की फोटो-रिपोर्ट देते हैं। आप अपने शहर के धार्मिक आयोजनों के बारे में स्थानीय मंदिर या पंडाल से समय व निर्देश ले लें।
अंत में, कार्तिक पूर्णिमा व्यक्तिगत श्रद्धा का दिन है—चाहे आप घाट पर दीप जलाएँ, मंदिर में पूजा करें या घर पर दान दें, मकसद पुण्य और शांति होना चाहिए। सुरक्षित तरीके से समारोह मनाएँ और प्रकृति का ख्याल रखें।

कार्तिक पूर्णिमा 2024: भक्तों ने लिया गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु की पूजा
- नव॰, 16 2024
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कार्तिक पूर्णिमा 2024 के अवसर पर, लाखों भक्तों ने बिहार की गंगा, गंडक, कोसी, महानंदा, सरयू, और बागमती नदियों में पवित्र स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की। यह दिन हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है, जब भक्तों का मानना है कि पवित्र स्नान से पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक जागृति प्राप्त होती है।
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