ईद उल अज़हा: क्या है और क्यों मनाते हैं?
ईद उल अज़हा इस्लामी कैलेंडर की महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। यह हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। परिवार, पड़ोसी और जरूरतमंदों के साथ मिलकर नमाज़, कुर्बानी और दान-पुण्य की रस्में निभाई जाती हैं।
तारीख हर साल हिजरी महीने धु अल-हिज्जा के हिसाब से बदलती है। अक्सर ईद की शुरुआत चाँद दिखने से तय होती है, इसलिए स्थानीय धार्मिक और खालिफा कमेटी की सूचनाओं पर ध्यान दें।
ईद की तैयारियाँ और नमाज़
ईद की सुबह आमतौर पर बागी या मस्जिद में सामूहिक नमाज़ से शुरू होती है। आप साफ कपड़े, ईद की तकबीर और आरामदायक जूते रखें। घर से निकलने से पहले नक़्ल (ईद का नमाज़ पढ़ने का समय) और स्थान की जानकारी जाँच लें।
नमाज़ के बाद लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं, दुआएँ सुनाते हैं और बच्चों को ईदगाह या घर पर मीठा खिलाते हैं। घर पर या मुस्लिम समुदाय के साथ जुड़ी जगहों पर ईद मिलन का आयोजन आम है।
क़ुर्बानी के नियम और व्यावहारिक सुझाव
कुर्बानी का मकसद नेक नियत से पशु की बलि देना और मांस का वितरण करना है। कुर्बानी आम तौर पर धु अल-हिज्जा की 10वीं तारीख को होती है; कई समुदाय 11वीं और 12वीं को भी कुर्बानी करते हैं। स्थानीय धार्मिक सलाहकार की बात सुनें ताकि तारीख और तरीका सही रहे।
पशु लेते समय इन बातों का ध्यान रखें: पशु स्वस्थ हो, कोई चोट या बीमारी न हो, और स्थानीय धार्मिक मानदंडों के अनुसार उसकी आयु उपयुक्त हो। कहां से खरीद रहे हैं—स्थानीय बाजार, पंजीकृत बूचड़खाना या समुदायिक नीलामी—इस पर पहले से निर्णय लें।
कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बाँटना अच्छी आदत है: परिवार के लिए, रिश्तेदार और मित्रों के लिए, और जरूरतमंदों के बीच दान के लिए। जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए स्थानीय मौलवी, मदरसा या एनजीओ से संपर्क करें—वे सूची और वितरण में मदद कर देते हैं।
हाइजीन का खास ख्याल रखें: मांस को तुरंत ठंडा करें, साफ बर्तनों में रखें और बच्चों से दूर रखें। गांव या खुले स्थान पर कुर्बानी कर रहे हैं तो पानी और सफाई का इंतज़ाम पहले से कर लें।
क्या आप पहली बार क़ुर्बानी कर रहे हैं? स्थानीय इमाम या मुस्लिम वेलफेयर ग्रुप से सलाह लें। वे सही तरीका, जकात और क़र्ज़ के बारे में भी मार्गदर्शन देंगे।
शहरों में कई जगह सामुदायिक बूचड़खाने और ऑनलाइन कुर्बानी सर्विस भी उपलब्ध हैं—ये सुविधाजनक हैं और दस्तावेज़ीकरण, स्लॉटरिंग और पैकिंग का काम संभाल लेते हैं।
अंत में, ईद उल अज़हा एक साझा भावना का त्यौहार है—विवेक के साथ कुर्बानी करें, जरूरतमंदों को प्राथमिकता दें और अपने पड़ोसियों के साथ तहे दिल से खुशियाँ बाँटें। जमा समाचार पर ईद से जुड़ी ताज़ा खबरें और लोकल इवेंट्स की जानकारी के लिए टैग के लेख नियमित देखें।

ईद उल अज़हा नमाज़ समय: दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई और हैदराबाद में बकरीद की नमाज़ के समय जानें
- जून, 16 2024
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ईद उल अज़हा कल भारत में धूमधाम से मनाई जाएगी, जिसमें मुसलमान इस पवित्र अवसर के लिए तैयारी कर रहे हैं। लेख में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई और हैदराबाद सहित भारत के विभिन्न शहरों में ईद प्रार्थनाओं के समय का विवरण दिया गया है।
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