होली — रंग, रिवाज और समझदारी के साथ मनाने का तरीका
होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, यह मिलने-जुलने, गिल-शिकवे भूलने और नए सिरे से रिश्ते बनाने का मौका है। पर क्या आप जानते हैं कि थोड़ा ध्यान रखने से यह त्योहार और सुरक्षित, साफ और यादगार बन सकता है? नीचे सीधी, काम की जानकारी दे रहा/रही हूँ जो हर घर-परिवार और रिले के काम आएगी।
होली का समय और मान्यताएँ
होली आमतौर पर फाल्गुन महीने की पूर्णिमा (फाग) को मनाई जाती है। कुछ जगहों पर होलिका दहन एक दिन पहले होता है और रंगों वाला उत्सव अगले दिन होता है। यह त्योहार बुराई पर भलाई की जीत का प्रतीक है — होलिका दहन से रात का अनुष्ठान और अगले दिन रंगीन मिलन।
हर राज्य में रीति-रिवाज थोड़े अलग होते हैं। उत्तर में भांग और गीत, पश्चिम में रंगीले जलसे, और दक्षिण व पूर्व में अलग तरह के लोक नृत्य और भजन दिखाई देते हैं। अगर आप किसी नई जगह पर होली खेल रहे हैं तो स्थानीय परंपराओं का सम्मान रखें।
इको-फ्रेंडली रंग और घरेलू नुस्खे
केमिकल वाले रंग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदेह होते हैं। नेचुरल गुलाल बनाने के आसान तरीके: सूखे फूलों का पाउडर (गुलाब, गेंदा), चुकंदर का रस सूखा कर लाल रंग, पालक या मेथी का पाउडर हरा रंग, हल्दी का पीला रंग। चावल का आटा और कॉर्नस्टार्च भी बेस बन सकते हैं।
घरेलू रंग बनाने का तरीका सरल है: फूल सूखाएं, अच्छी तरह पीसकर छलनी से छान लें और थोड़े मौसमानुसार राइस फ्लोर या कॉर्नस्टार्च मिलाकर गुलाल तैयार करें। अगर थोड़ी खुशबू चाहिए तो नारियल तेल की बहुत कम मात्रा मिलाएं।
छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए हमेशा नेचर के रंग ही चुनें। आँखों और त्वचा के लिए सौम्य सामग्री ही उपयोग में लें।
रंग हटाने के आसान टिप्स: होली खेलने से पहले हल्का सा तेल या क्रीम बालों और चेहरे पर लगाएँ — इससे रंग उतारना आसान होगा। खेल के बाद नारियल तेल लगाकर कुछ घंटे रखें और फिर हल्के शैम्पू से धोएं। चेहरे के लिए मुल्तानी मिट्टी या बेसन-मधु का पेस्ट उपयोगी रहता है।
सुरक्षा और शिष्टाचार भी जरूरी हैं। बिना अनुमति के किसी पर रंग न डालें, किसी को असहज न करें, और ड्राइवर या सड़क पर काम कर रहे लोगों को रंग खेलने से बचाएँ। पानी के गुब्बारे और पिचकारी उपयोग करते समय सतर्क रहें—किसी के चेहरे पर सीधे पानी न मारें।
समूह आयोजनों में कचरा प्रबंधन पर ध्यान दें: प्लास्टिक पाउच कम इस्तेमाल करें, रंगों के पैकेट लोकल और बायोडिग्रेडेबल चुनें, और बाद में साफ-सफाई में हाथ बटाएँ।
खाने-पीने की बात: होली के व्यंजनों में गुझिया, ठंडाई और दही वड़ा लोकप्रिय हैं। अगर बाहर कार्यक्रम में हैं, तो खाने में अलर्जी वाले लोगों के लिए विकल्प रखें।
चलिए, इस बार होली ऐसे मनाएँ कि रंगों की खुशियाँ टिकें, पर असर स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कम हो। थोड़ी सी समझदारी और नेचर-फ्रेंडली चुनौतियों से होली और भी खूबसूरत बन सकती है। शुभ होली!

उत्तर प्रदेश में होली पर मौसम का कहर: मेरठ से लखनऊ तक बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
- मार्च, 17 2025
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उत्तर प्रदेश में होली के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ने की संभावना है, जिसमें मेरठ से लखनऊ तक बारिश और तेज हवाएँ हो सकती हैं। भारतीय मौसम विभाग ने 14-15 मार्च को बारिश के अलर्ट जारी किए हैं, जिससे समारोहों में विघ्न पड़ सकता है। पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसमी प्रणालियाँ असामान्य ठंडक और वर्षा का कारण बन रही हैं।
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