बकरीद नमाज़ — समय, तरीका और क्या ज़रूरी है

बकरीद यानी ईद अल-अधा का दिन दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ने का मौका होता है। पहले काम: नमाज़ का समय जानिए। ईद की नमाज़ सूरज निकलने के बाद जब सूरज ऊँचा हो जाए तब अदा की जाती है — आमतौर पर सूर्योदय के लगभग 15-20 मिनट बाद से लेकर सुबह के मध्य तक। आपकी स्थानीय मस्जिद या उस्मानिया समितियों का टाइमिंग देखें।

ईद की नमाज़ का सामान्य तरीका

ईद की नमाज़ आमतौर पर दो रक'at होती है और इसके बाद खुतबा (वचन) रखा जाता है। तरीका ऐसा रखें कि मस्जिद के बड़े इमाम या समुदाय की भूमिका का पालन हो — मस्जिद की निर्देशों का हमेशा सम्मान करें। यहाँ एक साफ-सीधी रूपरेखा दी जा रही है जो अक्सर अपनाई जाती है:

1) नमाज़ के लिए साफ और भारी कपड़े पहनें। ईद पर खुशमिजाज़ होना अच्छा माना जाता है।

2) नमाज़ शुरू करने से पहले इमाम की शुरुआत तक खड़ा रहें। जब इमाम Takbir कहे तो उसके साथ शामिल हों।

3) हर मस्जिद की प्रथा अलग होती है, पर आम तौर पर पहली रक'at में अतिरिक्त तकबीरें दी जाती हैं। बहुत से मुसलमान पहली रक'at में सात बार और दूसरी रक'at में पाँच बार "Allahu Akbar" कहते हैं — यह प्रथा समुदाय पर निर्भर करती है।

4) रक'atें पूरी करने के बाद इमाम खुतबा देता है। खुतबा सुनना महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब उसमें सामाजिक संदेश और ईद के धार्मिक पहलू बताए जाते हैं।

खुतबा और क़ुर्बानी के प्रमुख नियम

खुतबा के बाद अक्सर लोग एक-दूसरे को मिठाई और बधाई देते हैं, फिर क़ुर्बानी का समय आता है। कुरबानी की फ़िक़ह के अनुसार क़ुर्बानी का समय ईद की नमाज़ के बाद शुरू होता है और आमतौर पर तीन दिनों तक जारी रहती है (पहले दिन से लेकर तीसरे दिन तक)। यह नियम अलग- अलग स्कूलों में थोड़ा फ़र्क़ कर सकता है, इसलिए अपने स्थानीय धार्मिक प्राधिकरण से पुष्टि कर लें।

कुर्बानी करते वक्त ध्यान रखें: जानवर स्वस्थ हो, मांस हिफाज़त से बांटें और जरूरतमंदों तक पहुँचे। हाइजीन और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखें — सार्वजनिक जगहों पर सफाई रखें और बचे हुए मांस का सही इस्तेमाल करें।

कुछ आसान टिप्स — सुबह जल्दी जाएँ ताकि भीड़ में व्यवधान न हो; बच्चों को शांत रखें; बुजुर्गों का ध्यान रखें; मोबाइल पर तस्वीरें लेने से पहले अनुमति लें। अगर मस्जिद में बैठने की जगह कम हो, तो पड़ोसियों के साथ मिलकर सामूहिक व्यवस्था करें।

अगर आप पहले बार ईद नमाज़ में जा रहे हैं तो क्या करें? सावधानी से इमाम की सुनें और उसी के अनुसार कदम बढ़ाएँ। अगर किसी बात में अनिश्चितता हो तो स्थानीय इस्लामी केंद्र या मस्जिद से संपर्क करें।

बकरीद का दिन धर्म और परंपरा का मेल है — नमाज़ और कुरबानी दोनों का मकसद इंसानियत और मेहनत का साझा संदेश देना है। इस साल ईद पर नमाज़ ठीक समय पर पढ़ें, खुतबा सुनें, और क़ुर्बानी की नियत से जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाएं।

ईद उल अज़हा नमाज़ समय: दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई और हैदराबाद में बकरीद की नमाज़ के समय जानें

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  • जून, 16 2024
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ईद उल अज़हा कल भारत में धूमधाम से मनाई जाएगी, जिसमें मुसलमान इस पवित्र अवसर के लिए तैयारी कर रहे हैं। लेख में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई और हैदराबाद सहित भारत के विभिन्न शहरों में ईद प्रार्थनाओं के समय का विवरण दिया गया है।