सोलौरियम ग्रीन एनर्जी: घर और कारोबार के लिए सोलर विकल्प
छत पर सोलर लगवाने का विचार अच्छा है, पर कहाँ से शुरू करें? सोलौरियम ग्रीन एनर्जी टैग पेज पर आपको सरल और सीधे तरीके मिलेंगे — क्या चुनें, कितना खर्च आएगा, और कौन-कौन से नियम और सब्सिडी काम आएंगी। यहाँ हर बात को आसान तरीके से समझाया गया है ताकि आप निर्णय तेज़ और समझदारी से ले सकें।
किस चीज़ का ध्यान रखें — 6 आसान सवाल
1) आपकी सालाना बिजली खपत कितनी है? सरल तरीका: पिछले 12 महीनों के बिल से कुल यूनिट ÷ 12 = मासिक औसत। इससे सिस्टम की क्षमता (kW) तय होती है।
2) छत का आकार और दिशा क्या है? दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम वाली छत बेहतर आउटपुट देती है। छाया (पेड़, बिल्डिंग) कम हो तो पैनल अच्छे से काम करेंगे।
3) ग्रिड-टाइंड या बैटरी बैकअप? अगर कट-ऑफ अक्सर होते हैं तो बैटरी अच्छी रहेगी—पर लागत बढ़ेगी। ग्रिड-टाइंड सिस्टम कम खर्च वाला और रिटर्न तेज़ देता है।
4) पैनल और इन्वर्टर की वारंटी क्या है? अच्छे पैनल की पावर वारंटी 25 साल, इन्वर्टर की वारंटी 5-10 साल होती है। सस्ती चीज़ लेने से बाद में दिक्कतें मिल सकती हैं।
5) नेट मीटरिंग और डिस्कॉम की नीतियाँ क्या हैं? हर राज्य की नियम अलग हैं, इसलिए अपने बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) से नेट मीटरिंग नियम और पेमेंट रेट्स चेक करें।
6) इंस्टॉलर का प्रमाणन? MNRE/आधिकारिक प्रमाणन और स्थानीय रेफरेंस देखें। अनुबंध में इंस्टॉलेशन, कनेक्शन और वारंटी स्पष्ट लिखवाएँ।
इंस्टॉलेशन, लागत और रखरखाव — सीधे टिप्स
इंस्टॉलेशन शुरुआत में जमीन से ऊपर का काम है: साइट सर्वे, शेड डायग्नोसिस, पैनल मॉड्यूलिंग, इलेक्ट्रिकल कनेक्शन और नेट मीटरिंग का कागजी काम। भारत में 1 kW rooftop सिस्टम आमतौर पर सालाना 1200–1500 kWh दे सकता है (स्थल और मौसम पर निर्भर)।
लागत: ग्रिड-टाइंड 1 kW सिस्टम की अनुमानित कीमत में पैनल, इन्वर्टर और इंस्टालेशन शामिल होकर आमतौर पर ₹40,000–₹70,000 तक होती है (ब्रांड और गुणवत्ता पर निर्भर)। बैटरी जोड़ने पर लागत काफी बढ़ जाती है।
सब्सिडी: केंद्र और राज्य के कई स्कीम चलते हैं। सब्सिडी और टैक्स लाभ के लिए स्थानीय सरकारी पोर्टल और DISCOM के ऑफिशियल पेज देखें।
रखरखाव: पैनल साफ़ रखें (बारिश के बाद पानी से साफ़ी या हर 3–6 महीनों में), इन्वर्टर की रिपोर्टिंग देखें, कनेक्शन और वायरिंग की सालाना जांच कराएँ। छोटी सी जाँच से आउटपुट बड़ा रहता है।
गलतियाँ जो बचें: छाया अनदेखी न करें, सस्ते इन्वर्टर और बिना वारंटी के पैनल नहीं लें, और असमर्थ इंस्टॉलर पर भरोसा न करें।
अगर आप रेट, इंस्टॉलर या सब्सिडी की सही जानकारी चाहते हैं तो अपने शहर और डिस्कॉम का नाम बताइए—मैं आसान कदम बताऊँगा जिससे आप सोलर पर तेज और समझदारी से आगे बढ़ सकें।

सोलौरियम ग्रीन एनर्जी ने बीएसई एसएमई के साथ आईपीओ लॉन्च करने के लिए डीआरएचपी फाइल किया
- सित॰, 13 2024
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सोलौरियम ग्रीन एनर्जी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के एसएमई प्लेटफॉर्म के साथ अपने प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ) के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) फाइल किया है। कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से 55 लाख इक्विटी शेयर जारी करने की योजना बना रही है। यह विकास सौर ऊर्जा कंपनियों द्वारा सार्वजनिक पेशकशों के माध्यम से पूंजी जुटाने के चलन का हिस्सा है।
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