बोनस शेयर क्या हैं और आपको क्यों जानना चाहिए
बोनस शेयर अक्सर "मुफ्त शेयर" कहलाते हैं, लेकिन यह मुफ्त नहीं—यह कंपनी के रिज़र्व को शेयरधारिता में बदलने का तरीका है। कंपनी अपने लाभ-रिज़र्व से नये शेयर जारी करती है और पुराने शेयरधारकों को तय अनुपात में देती है। इससे कंपनी की कुल मार्केट कैपियलाइज़ेशन में खास फर्क नहीं आता, पर आपके पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।
बोनस शेयर कैसे जारी होते हैं — सरल चरण
पहला कदम बोर्ड की मंज़ूरी: कंपनी का बोर्ड बोनस इश्यू को मंजूर करता है और एक रिकॉर्ड डेट तय करता है। रिकॉर्ड डेट तय होने पर जिन लोगों के पास उस दिन कंपनी के शेयर डिमैट में होंगे, वही बोनस के हकदार माने जाते हैं।
राशि और अनुपात: कंपनी बोनस रेशियो घोषित करती है, जैसे 1:1, 2:1, 1:2। उदाहरण: अगर रेशियो 1:2 है और आपके पास 100 शेयर हैं, तो आपको 50 बोनस शेयर मिलेंगे।
अलॉटमेंट और लिस्टिंग: रिकॉर्ड डेट के बाद बुक-इंग और अलॉटमेंट होता है। कुछ दिनों में बोनस शेयर आपके डिमैट खाते में दिखने लगते हैं और बाद में वे एक्सचेंज पर ट्रेड करने लगते हैं।
बोनस शेयर का शेयर की कीमत पर असर और टैक्स
बोनस मिलने पर शेयर का प्राइस सामान्यतः कट जाता है ताकि कंपनी की कुल वैल्यू वही रहे। उदाहरण: 1:1 बोनस पर कीमत लगभग आधी दिखेगी, पर आपके शेयर दोगुने होंगे। इसलिए अचानक आय नहीं, सिर्फ शेयर संरचना में बदलाव होता है।
टैक्स पर ध्यान दें: बोनस शेयर मिलने पर आमतौर पर तभी टैक्स लगता है जब आप उन्हें बेचते हैं। बेचने पर कैपिटल गेन नियम लागू होंगे—शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म के हिसाब से। सही गणना और फाइलिंग के लिए अपने CA या टैक्स सलाहकार से बात करें।
डिविडेंड पर असर: बोनस शेयर मिलने के बाद प्रति शेयर दीवाइडेंड घट सकता है क्योंकि शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। कुल मिलाकर कंपनी का कुल डिविडेंड पेआउट वही रह सकता है या बदल सकता है—यह कंपनी के निर्णय पर निर्भर है।
निवेशकों के लिए प्रैक्टिकल टिप्स
1) रिकॉर्ड डेट से पहले ट्रांज़ैक्शन का ध्यान रखें — अगर आप बोनस चाहिए तो रिकॉर्ड डेट तक शेयर रखें।
2) बोनस सिर्फ सिटीज़नशिप वैल्यू नहीं बढ़ाते। कंपनी क्यों बोनस दे रही है — क्या रिज़र्व की वजह से या शेयरलिक्विडिटी बढ़ाने के लिए? कारण समझ लें।
3) बोनस के बाद शेयर की कीमत में गिरावट सामान्य है। अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं, तो यह अधिक चिंता का कारण नहीं होना चाहिए। ट्रेडिंग प्लान बनाएं: अलॉटमेंट के बाद बेचने का निर्णय भाव और टैक्स प्रभाव देखकर लें।
4) ब्रोकर और डिमैट अकाउंट ट्रैक करें — बोनस अलॉटमेंट आने में कुछ दिन लग सकते हैं। गलतियों से बचने के लिए कंपनी की नोटिस और RTA (रजिस्ट्रार) की जानकारी देखें।
5) टैक्स और हिसाब के लिए रिकॉर्ड रखें — बोनस अलॉटमेंट नोटिस, शेयर खाता स्टेटमेंट और खरीद के बिल संभाल कर रखें।
बोनस शेयर से फायदा उठाना है तो वजह समझें, रिकॉर्ड डेट का ध्यान रखें और टैक्स/रिस्क की पूरी जानकारी लें। तुरंत बिक्री के बजाय एक स्पष्ट योजना बनाएँ — यह अच्छा निवेश निर्णय लेने में मदद करेगा।

सीडीएसएल द्वारा बोनस शेयर जारी होने से शेयर बाजार में 16% की वृद्धि
- जून, 28 2024
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सेंट्रल डिपोजिटरी सर्विसेज़ (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) ने 2 जुलाई 2023 को बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव विचार करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद, सीडीएसएल के शेयर में 16% की वृद्धि दर्ज की गई है और बीएसई पर यह Rs 1,434.95 तक पहुंच गया है। कंपनी के इस कदम से मौजूदा शेयरधारकों को लाभ मिलेगा और निवेशकों में सकारात्मक भावना उत्पन्न हुई है।
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