धनबाद के केंदूआडिह में जहरीली गैस का लीक, तीन मौतें और लगातार 15 दिनों से खतरा

धनबाद के केंदूआडिह में जहरीली गैस का लीक, तीन मौतें और लगातार 15 दिनों से खतरा मार्च, 18 2026

धनबाद के केंदूआडिह क्षेत्र में बंद कोयला खदानों से जहरीली गैस का लीक लगातार 15 दिनों से जारी है — और इसका असर अब सिर्फ एक इलाके तक ही सीमित नहीं है। तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें से एक पीड़ित का नाम सुरेंध सिंह है। ये गैसें भारत कोकिंग कोयला लिमिटेड (BCCL) की पुरानी खदानों से निकल रही हैं, और राजपूत बस्ती, मस्के मोहल्ला, अधिकारी कॉलोनी और केंद्रा जैसे आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब हर दिन सांस लेने के लिए लड़ रहे हैं।

गैस का खतरा: आंखें जल रही हैं, सिर दर्द हो रहा है

जो लोग यहां रहते हैं, उनकी शिकायतें एक जैसी हैं — आंखों में जलन, सिर दर्द, उल्टी, चक्कर और सांस लेने में तकलीफ। कई महिलाएं और बच्चे इतने डर गए हैं कि वे अपने रिश्तेदारों के घर, जैसे दिहाड़ा, आसनसोल, गिरिडीह या लोयाबाद, चले गए हैं। एक रोगी को सेंट्रल हॉस्पिटल धनबाद और दस रोगियों को कुस्तूरा रीजनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। लेकिन ये सिर्फ शीर्षक हैं — पीड़ितों की संख्या इतनी अधिक है कि असली आंकड़े कभी सामने नहीं आए।

सरकारी प्रतिक्रिया: NDRF, IIT और DGMS का संयुक्त प्रयास

जिला कलेक्टर आदित्य रंजन ने सोमवार को NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) के साथ एक बैठक की, जिसमें AC विनोद कुमार, DDMO संजय झा और NDRF अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में गैस के लीक के तीन-चार स्रोतों की पहचान करने और उनके नियंत्रण के लिए तकनीकी योजना बनाने की बात हुई। लेकिन यहां तक कि IIT, DGMS और Sinfer के विशेषज्ञ भी अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए। उन्होंने गैस के घनत्व को मापा, भूमि के अंदर के दबाव को अनुमान लगाया, लेकिन गैस का रुकना दूर का सपना है।

राज्य के सीएस ने देखा आंचलिक विकास का असली चेहरा

शुक्रवार को राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने स्वयं केंदूआडिह का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों का निरीक्षण किया और लोगों की शिकायतें सुनीं। एक महिला ने उन्हें बताया, "हमारे बच्चे रात में रोते हैं, क्योंकि गैस की बहार उनके सांसों में घुस जाती है।" उनके बयान ने यह साबित कर दिया कि यह कोई तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि मानवीय आपदा है।

राहत शिविर और बेकार की वादा-बाजी

राहत शिविर और बेकार की वादा-बाजी

जिला प्रशासन और BCCL ने राहत शिविर लगाए हैं — लेकिन ये शिविर खाली दीवारों और खिड़कियों वाले कमरे हैं, जहां बिजली नहीं, पानी नहीं, और डॉक्टर भी बहुत कम। एक वृद्धा ने बताया, "हमें तो बस एक चावल का बर्तन दिया गया, बाकी तो यहीं रहो, गैस चली जाएगी।" लेकिन गैस नहीं चली। बल्कि यह तेज हो रही है।

खदानों की अंधेरी विरासत: जहरीला इतिहास

केंदूआडिह की यह समस्या नयी नहीं है। यहां 2018 से ही गैस लीक की शिकायतें आती रही हैं। जहरीली गैसों का कारण है — बंद कोयला खदानों में अचानक आग लग जाना और उसके बाद भूमि के अंदर जहरीली गैसों का बनना। यह तब तक चलता रहता है जब तक भूमि के अंदर उन गैसों का निकास नहीं हो जाता। लेकिन जहरिया नियोजन अभी तक बस एक दस्तावेज़ है। जहरिया मास्टर प्लान की समीक्षा तो हुई, लेकिन उसका कोई असर नहीं।

देश का दूसरा जहरिया बेड: क्या यह सिर्फ धनबाद की समस्या है?

यह समस्या धनबाद तक सीमित नहीं। जारखंड के बाकी हिस्सों, विशेषकर जहरिया, बांका और बोकारो में भी ऐसे बंद कोयला खदान हैं, जहां आग अभी भी अंदर जल रही है। JRDA ने अपनी रिपोर्ट में यही बात कही है — यह एक राष्ट्रीय आपदा का संकेत है। लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक कोई विशेष योजना नहीं बनाई।

अगला कदम: क्या होगा अगले हफ्ते?

अगला कदम: क्या होगा अगले हफ्ते?

अब तक का एकमात्र वास्तविक कदम तो यही है कि बच्चों और महिलाओं को भेज दिया गया है। लेकिन अगले हफ्ते क्या होगा? गैस का स्रोत अभी भी अज्ञात है। बीसीसीएल कहता है कि वे "प्रयास कर रहे हैं"। NDRF कहता है कि वे "पर्याप्त डेटा नहीं ले पा रहे हैं"। IIT के वैज्ञानिक बताते हैं कि इसके लिए गहरी भूमि स्कैनिंग और गैस निकास के लिए ड्रिलिंग की आवश्यकता है — लेकिन पैसा नहीं, न तो राजनीति, न तो ताकत।

क्या यह एक आपदा है या एक अनदेखी जलन?

इस तरह के दुर्घटनाओं के बारे में जब तक कोई मरता नहीं, तब तक ये समस्याएं अनदेखी रहती हैं। यहां तीन मौतें हो चुकी हैं — लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई। कौन जिम्मेदार है? क्या BCCL के बंद करने के बाद भी गैस के नियंत्रण का कोई योजना नहीं था? क्या राज्य सरकार ने कभी जहरिया के लिए एक वास्तविक रिकवरी योजना बनाई है? ये सवाल अभी भी खाली हवा में तैर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंदूआडिह में गैस लीक का कारण क्या है?

गैस लीक का कारण है बंद कोयला खदानों में अचानक आग लग जाना, जिससे भूमि के अंदर जहरीली गैसें बनती हैं। इन खदानों को 1980-90 के दशक में बंद कर दिया गया था, लेकिन उनका नियंत्रण और सुरक्षा के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई। अब ये गैसें जमीन के भीतर से रिस रही हैं और आसपास के आवासीय क्षेत्रों में पहुंच रही हैं।

इस घटना से जुड़े तीन लोगों की मौत के बारे में क्या जानकारी है?

तीन मौतें पुष्ट हुई हैं — दो महिलाएं और एक पुरुष, सुरेंध सिंह। सभी की मौत गैस के लंबे समय तक सांस लेने के कारण हुई है। उनके शरीर में अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर बहुत अधिक पाए गए। लेकिन अभी तक कोई औपचारिक जांच नहीं हुई है, और किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

IIT और DGMS ने क्या किया है?

IIT के वैज्ञानिकों ने भूमि के अंदर के गैस स्रोतों को मापने के लिए जीएसएस (Geospatial Survey System) का उपयोग किया है। DGMS ने गैस के घनत्व और दबाव के आंकड़े जमा किए हैं। लेकिन ये सब डेटा अभी तक एक रिपोर्ट के रूप में ही रह गया है। कोई भी वास्तविक कार्रवाई — जैसे गैस के निकास के लिए ड्रिलिंग या भूमि को बंद करना — नहीं हुई है।

क्या जहरिया मास्टर प्लान का कोई असर हुआ है?

जहरिया मास्टर प्लान की समीक्षा 2022 में हुई थी, जिसमें गैस और भूमि सिंकिंग के प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास का आह्वान किया गया था। लेकिन इसके तहत कोई नया फंड नहीं आया। जहरिया के 12 गांवों में से केवल एक गांव को ही अभी तक पुनर्वास दिया गया है। इसलिए केंदूआडिह की समस्या एक अकेली घटना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत असफलता का परिणाम है।

अगले कदम में क्या बदलाव हो सकता है?

अगले कदम में नियामकों को तीन चीजें करनी होंगी: पहले, गैस के स्रोतों को भूमि के अंदर से निकालने के लिए ड्रिलिंग शुरू करनी होगी; दूसरे, आसपास के सभी घरों में गैस संसूचक लगाने होंगे; तीसरे, अस्थायी रूप से आवासीय क्षेत्रों को बंद कर देना होगा। लेकिन अभी तक किसी को इन बातों के लिए तैयार नहीं दिख रहा।

क्या भारत कोकिंग कोयला लिमिटेड (BCCL) जिम्मेदार है?

हां। BCCL ने 1990 के दशक में इन खदानों को बंद कर दिया, लेकिन उनके नियंत्रण के लिए कोई योजना नहीं बनाई। भारतीय कोयला कानून के तहत, बंद कोयला खदानों के लिए नियमित निरीक्षण और सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं। लेकिन BCCL ने इन नियमों का उल्लंघन किया है — जिसके लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

17 टिप्पणि

  • Image placeholder

    Krishnendu Nath

    मार्च 20, 2026 AT 05:18

    ये गैस लीक तो सिर्फ धनबाद की बात नहीं है भाई साहब, जहरिया, बांका, बोकारो में भी यही हो रहा है। BCCL के बंद करने के बाद भी कोई योजना नहीं बनाई गई, ये तो सरकारी अनदेखी का खेल है। लोग मर रहे हैं, और हम बस रिपोर्ट्स पढ़ रहे हैं।

  • Image placeholder

    dinesh baswe

    मार्च 20, 2026 AT 10:42

    इस समस्या को तकनीकी रूप से समझना जरूरी है। बंद खदानों में जब कोयला अचानक जलता है, तो गैसों का निर्माण होता है जो भूमि के भीतर से रिसती है। इसका समाधान ड्रिलिंग और गैस निकास के जरिए ही संभव है, लेकिन ये सब तब तक नहीं होगा जब तक राज्य और केंद्र सरकार साथ नहीं आती।

  • Image placeholder

    Boobalan Govindaraj

    मार्च 21, 2026 AT 09:33

    हमें इसे एक मानवीय संकट के रूप में देखना होगा, न कि एक तकनीकी बात के रूप में। बच्चे रात में रोते हैं, महिलाएं डर के मारे घर छोड़ रही हैं। राहत शिविर में बिजली नहीं, पानी नहीं, डॉक्टर भी नहीं। ये क्या हो रहा है? हम सब इसे बर्दाश्त कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई अंत नहीं दिख रहा।

  • Image placeholder

    Sandeep YADUVANSHI

    मार्च 23, 2026 AT 07:28

    अरे ये सब तो बस बहाना है। अगर ये गैस इतनी खतरनाक है तो फिर इतने सालों से यहां कैसे रहे? लोग तो अपने आप को बहुत शिकायत करते हैं। शायद ये सब फेक न्यूज है।

  • Image placeholder

    Vikram S

    मार्च 23, 2026 AT 20:58

    भारत को अपनी आत्मनिर्भरता पर गर्व है, लेकिन इस तरह के दुर्घटनाओं के बारे में जब तक कोई मरता नहीं, तब तक कोई नहीं सुनता! ये गैस लीक किसी विदेशी षड्यंत्र का हिस्सा है। जिन्होंने ये खदानें बंद कीं, वो अपने देश के लिए नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियों के लिए काम कर रहे थे।

  • Image placeholder

    nithin shetty

    मार्च 24, 2026 AT 09:04

    क्या कोई जानता है कि गैस के घनत्व का मापन कैसे किया जाता है? IIT ने जीएसएस का इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी रिपोर्ट तो सिर्फ एक डॉक्यूमेंट बन गई। अगर हम इस डेटा को असली कार्रवाई में बदल नहीं पा रहे, तो फिर ये सब बेकार का खर्चा है।

  • Image placeholder

    Aman kumar singh

    मार्च 25, 2026 AT 10:04

    हमारे देश में ऐसी बहुत सारी समस्याएं हैं जिनका ध्यान नहीं दिया जाता। ये गैस लीक तो सिर्फ एक उदाहरण है। लेकिन अगर हम सब मिलकर आवाज उठाएं, तो ये बदल सकता है। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।

  • Image placeholder

    UMESH joshi

    मार्च 27, 2026 AT 06:38

    क्या हम ये सोच रहे हैं कि जब तक हम नहीं बदलेंगे, तब तक दुनिया नहीं बदलेगी? ये गैस लीक तो बस एक लक्षण है। असली समस्या ये है कि हम अपने इतिहास को नहीं समझते। हमने उद्योग को बढ़ावा दिया, लेकिन उसके परिणामों के लिए जिम्मेदारी नहीं ली।

  • Image placeholder

    pradeep raj

    मार्च 28, 2026 AT 12:27

    इस समस्या के विश्लेषण में हमें भूमि संरचना, ज्वालामुखीय गतिविधि, और जैविक अपघटन के बीच संबंध को समझना होगा। बंद कोयला खदानों में जब ऑक्सीजन की कमी होती है, तो अपूर्ण जलन के कारण जहरीली गैसें बनती हैं, जो भूमि के अंदर दबाव बनाती हैं। इन दबावों के नियंत्रण के लिए गहरी ड्रिलिंग और गैस निकास की आवश्यकता है।

  • Image placeholder

    Vishala Vemulapadu

    मार्च 30, 2026 AT 09:08

    जहरिया मास्टर प्लान की समीक्षा 2022 में हुई थी, और उसमें पुनर्वास का आह्वान किया गया था। लेकिन फंड नहीं आया। ये सब तो बस दस्तावेज़ का खेल है।

  • Image placeholder

    M Ganesan

    मार्च 31, 2026 AT 19:15

    ये सब एक षड्यंत्र है। जिन्होंने खदानें बंद कीं, वो अपने देश को नष्ट कर रहे हैं। ये गैस लीक जानबूझकर किया गया है ताकि लोग डर जाएं और वो अपने दावों को आगे बढ़ा सकें। ये सरकार और BCCL का साजिश है।

  • Image placeholder

    ankur Rawat

    अप्रैल 1, 2026 AT 18:54

    हमें ये समझना होगा कि ये समस्या नयी नहीं है। ये तो 2018 से चल रही है। लेकिन हमने अपने आप को इसके बारे में भूल गए। अगर हम अपने आसपास के लोगों को सुनें, तो शायद ये समस्या ठीक हो सकती है।

  • Image placeholder

    Vraj Shah

    अप्रैल 2, 2026 AT 03:05

    बस एक बात कहूं - राहत शिविर में चावल का बर्तन देना कोई समाधान नहीं है। लोगों को घर वापस लौटाना होगा, लेकिन उनके घर तो अभी भी जहरीले हैं।

  • Image placeholder

    Kumar Deepak

    अप्रैल 3, 2026 AT 03:36

    अरे ये तो बस बॉस के लिए फोटो खींचने का मौका है। मुख्य सचिव आए, फिर न्यूज चैनल पर दिखे, फिर लोगों को बताया कि "हम सब कुछ कर रहे हैं"। लेकिन गैस तो अभी भी बढ़ रही है।

  • Image placeholder

    Ganesh Dhenu

    अप्रैल 4, 2026 AT 23:30

    हमारे देश में जब कोई आपदा होती है, तो लोग भाग जाते हैं। लेकिन जब वो वापस आते हैं, तो वो फिर से उसी जगह पर रहने लगते हैं। क्या हम अपने भाग्य को बदल नहीं सकते?

  • Image placeholder

    Yogananda C G

    अप्रैल 5, 2026 AT 02:43

    हमें ये समझना होगा कि ये गैस लीक एक लंबे समय तक चलने वाली समस्या है, और इसका समाधान एक दिन में नहीं हो सकता। लेकिन अगर हम लगातार दबाव बनाएं, तो ये जरूर बदलेगा। हमें आशा रखनी होगी।

  • Image placeholder

    Divyanshu Kumar

    अप्रैल 6, 2026 AT 10:36

    यहाँ तक कि जहरिया मास्टर प्लान की समीक्षा भी अब तक केवल एक दस्तावेज़ ही रह गई है। वास्तविक कार्रवाई का कोई अभियान नहीं हुआ। यह एक व्यवस्थागत विफलता है।

एक टिप्पणी लिखें